कोलन कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जो बड़ी आंत (को-लोन) में शुरू होता है। यह बृहदान्त्र पाचन तंत्र (digestive tract) का अंतिम हिस्सा है। कोलन कैंसर आमतौर पर वरिष्ठ लोगों को प्रभावित करता है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकता है। कोलोरेक्टल कैंसर की शुरुआत बड़ी आंत की दीवार के सबसे भीतरी परत में होती है। अधिकांश कोलोरेक्टल कैंसर छोटे पॉलीप्स (छोटी सूजन) से शुरू होते हैं। ये पॉलिप्स कोशिकाओं का एक समूह होते हैं। समय के साथ, इनमें से कुछ पॉलीप्स कैंसर में विकसित हो जाते हैं। यह कैंसर पहले बड़ी आंत की दीवार में, फिर आसपास के लिंफ नोड्स में और फिर पूरे शरीर में फैलता है।

आसान भाषा में अगर हम समझने की कोशिश करें तो कोलोन इंफेक्शन से मतलब है कोलोन यानी मलाशय की भीतरी परत पर सूजन होना। इसे कोलाइटिस के नाम से भी जाना जाता है। कोलाइटिस (Colitis) कई तरह के हो सकते हैं। कोलोन यानी मलाशय में बैक्टीरिया के प्रवेश या फिर किसी दूसरे कारण से संक्रमण हो जाना, जो आगे चलकर एक बडी बीमारी का रूप् ले लेता है।

यदि कोलन कैंसर विकसित होता है, तो इसे नियंत्रित करने में मदद करने के लिए कई उपचार उपलब्ध हैं, जिसमें सर्जरी,  दवा का उपचार जैसे कि कीमोथेरेपी, टारगेट थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी शामिल हैं।

कोलन कैंसर को कभी-कभी कोलोरेक्टल कैंसर भी कहा जाता है, जो एक ऐसा शब्द है जो बृहदान्त्र कैंसर और मलाशय कैंसर को जोड़ता है, जो मलाशय में शुरू होता है।

कोलोरेक्टल कैंसर के संभावित लक्षणः 

  • मल त्याग की आदतों में परिवर्तन लगातार दस्त, कब्जियत या यह महसूस करना कि पेट पूरी तरह से खाली नहीं है।
  • लगातार कमज़ोरी या थकान महसूस करना और भूख न लगना
  • वजन कम होना
  • हीमोग्लोबिन में कमी (एनीमिया)
  • पेट में दर्द या बेचैनी
  • आपकी आंत्र की आदतों में लगातार बदलाव, जिसमें दस्त या कब्ज या आपके मल की स्थिरता में बदलाव शामिल है।
  • मल में रक्तस्राव या रक्त
  • लगातार पेट की परेशानी, जैसे कि ऐंठन, गैस या दर्द।
  • यह महसूस करना कि आपका आंत्र पूरी तरह से खाली नहीं है।
  • कमजोरी या थकान

कोलन कैंसर से बचाव

  • एक स्वस्थ वजन बनाए रखें: कम से कम 11 विभिन्न कैंसर को वजन बढ़ने और मोटापे से जोड़ा गया है, जिसमें पेट का कैंसर भी शामिल है। आप स्वस्थ्य वजन बनाएं रखें। एक स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए, कैलोरी सेवन पर ध्यान दें, स्वस्थ भोजन खाएं, नियमित व्यायाम करें और उचित आदतों को बनाए रखें जिससे आपको पहली बार वजन कम करने में मदद मिली हो।
  • धूम्रपान न करें: हृदय रोग, स्ट्रोक और वातस्फीति जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने के लिए, बृहदान्त्र कैंसर सहित कम से कम 14 विभिन्न कैंसर का एक प्रमुख कारण धूम्रपान है। यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ने के वास्तविक लाभ हैं, जो आपके अंतिम सिगरेट के तुरंत बाद शुरू होते हैं।
  • शारीरिक रूप से सक्रिय रहें: शारीरिक तौर पर एक्टिव रहने से कई तरह की बिमारियों से बचा जा सकता है। यह पेट के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करता है। ज्यादा न सही थोडी ही एक्टिविटी कुछ न करने से बेहतर है, आप हर दिन लगभग 30 मिनट या थोडा ज्यादा वक्त के लिए एक्सरसाइज करने का लक्ष्य बनाएं। ऐसी चीजों को चुनें जो आपको पसंद हैं, जैसे तेज चलना, साइकिल चलाना, या डांस करना।
  • शराब के सेवन को आदत न बनाएंः स्वास्थ्य की बात हो तो शराब एक अजीब चीज है। यह निम्न स्तर पर कोलन और अन्य कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती है। यदि आप हिसाब से इसका सेवन करें तो सही रहेगा। यदि आप शराब नहीं पीते हैं, तो अच्छा होगा कि इसका सेवन शुरू न ही करें।
  • नियमित जांच: बृहदान्त्र कैंसर के लिए नियमित रूप से स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना खुद को बीमारी से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है। यह कैंसर को जल्दी पकड़ सकता है, जब यह सबसे अधिक इलाज योग्य है, और पॉलीप्स नामक असामान्य विकास को खोजने से बीमारी को रोकने में मदद कर सकता है जो आगे चलकर कैंसर में बदल सकता है। स्क्रीनिंग जांच 50 साल की उम्र होने पर करानी चाहिए।
  • पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी लें: इस बात के अच्छे प्रमाण हैं कि कैल्शियम और विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में मिलने से कोलन कैंसर से बचाव हो सकता है। कुछ अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि विटामिन डी, जिसे आप सूर्य के संपर्क से प्राप्त कर सकते हैं, कुछ खाद्य पदार्थों में, या एक विटामिन की गोलियां, कोलोरेक्टल कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी एक साथ काम कर सकते हैं, क्योंकि विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण में सहायक होता है। सभी अध्ययनों में यह नहीं पाया गया है कि इन पोषक तत्वों के पूरक जोखिम को कम करते हैं।
  • पोषणः आप आहार में भरपूर फाइबर, फल, सब्जियां और अच्छी गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट का सेवन करें। लाल मांस और संसाधित (processed) मांस के सेवन को सीमित कर दें या बंद कर दें। ज्यादा तेल के सेवन को सीमित रखेंआप चाहें तो एवोकाडो, जैतून का तेल, मछली के तेल और मेवे का सेवन करें।

कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग

डॉक्टर सलाह देते हैं कि बृहदान्त्र कैंसर के औसत जोखिम वाले लोग बृहदान्त्र कैंसर की जांच 50 साल की उम्र के आसपास करा सकते हैं। लेकिन जिन लोगों में ज्यादा जोखिम होता हैं, जैसे कि इसका पारिवारिक इतिहास, ऐसे में आपको जल्द ही स्क्रीनिंग पर विचार करना चाहिए। इसके लिए कई स्क्रीनिंग विकल्प मौजूद हैं। अपने डॉक्टर के साथ अपने विकल्पों के बारे में बात करें, और साथ में आप यह तय कर सकते हैं कि कौन से परीक्षण आपके लिए उपयुक्त हैं। कोलोरेक्टल कैंसर के लिए स्क्रीनिंग परीक्षणों में कोलोनोस्कोपी, सीटी कॉलोनोग्राफी, सिग्मायोडोस्कोपी और मल परीक्षण शामिल हैं।

मल या मल संबंधी रक्त परीक्षण (Faecal Occult Blood Test- एफओबीटी)

बृहदान्त्र और मलाशय के ट्यूमर धीरे-धीरे मल में बह जाते हैं। मल में मिश्रित रक्त की छोटी मात्रा आमतौर पर दिखाई नहीं देती है। मल रक्त परीक्षण दो प्रकार के होते हैं। पहले एक हनंपंब एफओबी के रूप में जाना जाता है। इस परीक्षण में, मल की एक छोटी मात्रा को एक विशेष कार्ड पर रक्त परीक्षण के लिए प्रस्फुटित किया जाता है जब एक रसायन को कार्ड में जोड़ा जाता है। आमतौर पर, लगातार तीन स्टूल कार्ड एकत्र किए जाते हैं। अन्य प्रकार का एफओबीटी एक इम्यूनोकेमिकल परीक्षण है जिसमें एक विशेष मल के नमूने में जोड़ा जाता है और प्रयोगशाला में एंटीबॉडी का उपयोग करके विश्लेषण किया जाता है जो एक मल के नमूने में रक्त का पता लगा सकता है। इम्यूनोकेमिकल परीक्षण एक मात्रात्मक परीक्षण है जो पॉलीप्स और कैंसर के निदान के लिए अधिक संवेदनशील और विशिष्ट है। 

कोलोनोस्कोपी

कोलोनोस्कोपी एक ऐसा परीक्षण है जिससे किसी व्यक्ति की बड़ी आंत की आंतरिक परत को देख सकते हैं। यदि आपके कोलन में पॉलीप्स हैं, तो आपके  डॉक्टर आमतौर पर उन्हें कोलोनोस्कोपी के दौरान निकाल सकते हैं। यही पॉलीप्स को निकाल लेने से आपके कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है। इस परीक्षण में एक पतली ट्यूब जिसमें प्रकाश और एक कैमरा लगाया हुआ होता है, अंत में आपके गुदा और बृहदान्त्र (आकृति) के अंदर डाली जाती हैे। आपका डॉक्टर पूरे बृहदान्त्र के अंदरूनी परत यानी के टिशू को देखेंगे। प्रक्रिया के दौरान किसी स्थान पर कोई संदेहदास्पद सूजन दिखने पर   आपके डॉक्टर बायोप्सी नामक एक परीक्षण कर सकते हैं। 

वर्चुअल कोलोनोस्कोपी

वर्चुअल कोलोनोस्कोपी एक ऐसी तकनीक है जो बृहदान्त्र की आभासी छवियों के निर्माण के लिए एक कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफिक (सीटी) स्कैन (एक प्रकार का तीन आयामी एक्स-रे) का उपयोग करती है जो ऑप्टिकल कोलोनोस्कोपी द्वारा प्रत्यक्ष अवलोकन द्वारा प्राप्त बृहदान्त्र के विचारों के समान हैं। वर्चुअल कोलोनोस्कोपी पारंपरिक कॉलोनोस्कोपी की तुलना में सरल और तेज तकनीक है और बेहोश करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

मल डीएनए परीक्षण

कोलोरेक्टल कैंसर के लिए मल डीएनए परीक्षण एक स्क्रीनिंग में उभरती तकनीक है। प्रीमलिग्नेंट अडीनोमास और कैंसर, अपनी कोशिकाओं से डीएनए मार्कर छोड़ते हैं जो पाचन प्रक्रिया के दौरान खंडित नहीं होते और मल में बने रहते हैं। जिसके बाद पीसीआर होता है, परख के लिए डीएनए को खोजने के स्तर तक परिवर्धित करता है। नैदानिक अध्ययनों ने 71% से 91%  के कैंसर खोज संवेदनशीलता को दर्शाया है।

कोलोरेक्टल कैंसर के लिए कब स्क्रीन करानी चाहिए?

  • यदि आपकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, तो आपको कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
  • यदि आपके परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर या पॉलीप्स का इतिहास है, तो 45 वर्ष की उम्र पर कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग करा लें।
  • यदि आपको कोलोरेक्टल कैंसर या पॉलीप्स पहले हो चूका है, तो नियमित तौर पर जांच कराते रहें।
  • यदि आप इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (अल्सरेटिव कोलाइटिस या क्रोन्स रोग) से पीड़ित हैं।
  • यदि आपको कैंसर के इलाज के लिए पेट (पेट) या पेल्विक क्षेत्र में रेडियोथेरेपी का इतिहास है।

दैनिक दिनचर्या में स्वास्थ्य बदलाव से कोलोन कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है और नियमित जांच से कैंसर को प्रारंभिक अवस्था में पकड़ा जा सकता है ताकि सही इलाज करके कैंसर को खत्म किया जा सके

Source: ONCO.COM

Leave a Reply

ArabicChinese (Simplified)EnglishFrenchGermanItalianJapanesePortugueseRussianSpanish

[mc4wp_form id="449"]